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संजीव कुमार
तीन दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस था। इस दिन डिसएबल्ड राइट्स ग्रुप (डीआरजी) के नेतृत्व में इंडिया गेट पर रैली और धरने का कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रांतों से हजारों मूक-बधिर, नेत्रहीन और विकलांग आए
'बाधाएं बांध नहीं सकतीं, आगे बढ़ने वालों को, विपदाएं रोक नहीं सकतीं, मर कर जीने वालों को।'
यह कहना है सागर पाराश्री का। सागर पाराश्री के बचपन से ही दोनों पैर ठीक से काम नहीं करते। वे व्हील चेयर के सहारे चलते हैं, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हुआ। उन्होंने आम लोगों की तरह ही पढ़ाई की और आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर वे शिक्षण का काम कर रहे हैं। इस दौरान उनके मन में कभी भी हीनता का भाव नहीं उपजा, क्योंकि उनका मानना है कि विपदाएं वैसे लोगों को रोक नहीं सकतीं, जो मर कर जीते हैं। यह कहानी सिर्फ सागर की ही नहीं है, बल्कि उन जैसे अनेक लोगों की है, जिन्होंने परिस्थितियों से हार नहीं मानी और खुद अपना रास्ता बनाया तथा अपनी मंजिल पाई। विश्व विकलांग दिवस के दिन ऐसे अनेक लोगों से मुलाकात हुई, जिन्होंने अपनी विकलांगता को ही अपनी शक्ति बना लिया। आज वे सब के सब अपने-अपने क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल कर नाम कमा रहे हैं।
तीन दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस था। इस दिन डिसएबल्ड राइट्स ग्रुप (डीआरजी) के नेतृत्व में इंडिया गेट पर एक रैली और धरने का कार्यक्रम किया गया। इस कार्यक्रम में भारत के विभिन्न प्रांतों से हजारों मूक-बधिर, नेत्रहीन और विकलांग आए थे। इंडिया गेट पर इस दिन का दृश्य देखने लायक था। ऐसी समरसता जल्दी दिखाई नहीं देती। कहीं कोई भेदभाव नहीं दिखाई पड़ रहा था। इस रैली में मराठी, भोजपुरी, अवधी, तमिल, कन्नड़, मलयाली, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, बंगाली आदि अन्यान्य भाषा-भाषी लोग आए थे, लेकिन यहां कहीं कोई भाषा, धर्म, संप्रदाय और जाति के आधार पर भेद नहीं दिखाई दे रहा था। काश, यह बात हमारे मराठी मानुष राज ठाकरे को भी समझ में आ जाती।
कार्यक्रम का आयोजन इंडिया गेट पर इसलिए रखा गया था कि विकलांगों की एकता की हुंकार सत्ताा के बहरे कानों तक पहुंच सके। इस कार्यक्रम में डीआरजी के संयोजक जावेद अबीदी का कहना था कि आज विश्व विकलांग दिवस के दिन पूरे देश के विकलांग इंडिया गेट पर एकत्रित होकर व्यवस्था में कुछ परिवर्तन लाना चाहते हैं, क्योंकि विकलांगता अब सिर्फ कल्याण का मुद्दा नहीं है। विकलांगों की समस्या का समाधान सिर्फ कल्याण की घोषणा करने से नहीं होगा। अब इन्हें मुख्यधारा में लाने की बात होनी चाहिए। इसलिए हम अपनी सारी शक्ति को एकत्रित करके सरकार को अपनी बात सुनाना चाहते हैं।
उनका कहना था कि आज हम अपनी सरकार और व्यवस्था से पूरी तरह दुखी हैं, क्योंकि आजादी के साठ सालों के बाद भी हम लोग उपेक्षित हैं और हमें हमारा अधिकार नहीं दिया जा रहा। इसलिए आज यहां एकत्रित हुए हैं। ऐसा नहीं है कि यह प्रदर्शन और रैली का काम एक दिन में हो गया है। इसके पीछे महीनों की मेहनत है, तब जाकर इतने विकलांग लोग यहां आए हैं। इन सभी को हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके दिल्ली पहुंचने में अनेक प्रकार के कष्ट झेलने पड़े होंगे। इसके लिए ये सभी बधाई के पात्र हैं। हमारी कुछ मांगें हैं, जिन्हें हम सरकार के द्वारा पूरी करवाना चाहते हैं। हम लोग भारत की आबादी में 6 प्रतिशत हैं। अगर जनजाति, एनआरआई और उत्तर-पूर्व के लिए अलग से मंत्रालय बन सकता है, तो 6 से 7 करोड़ की आबादी वाले विकलांग लोगों के लिए अलग से मंत्रालय या विभाग क्यों नहीं बन सकता? अभी तक इंटरनेट पर कोई भी ऐसी बेवसाइट नहीं है, जो विकलांगता को ध्यान में रखकर बनाई गई हो। यहां तक कि आज भी एक अच्छे किस्म की व्हील चेयर हमारे देश में नहीं मिलती। हम लोगों की इतनी बड़ी आबादी है, तो हम भी बराबरी के अधिकार के साथ कार्य करना और अपने देश की सेवा करना चाहते हैं। हम सभी भारत की अर्थव्यवस्था में उतना ही योगदान करते हैं, जितना कि आम आदमी। हम समाज पर एक बोझ नहीं हैं, क्योंकि हम सभी सरकार को टैक्स का भुगतान भी करते हैं। फिर हमारे साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जाता है। संविधान के अनुसार, सभी मंत्रालयों को अपने बजट का 3 प्रतिशत विकलांगता के लिए आवंटित करने का प्रावधान है, लेकिन हमें उतनी राशि नहीं मिलती। हमारे लिए 30 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी है, लेकिन हमें सभी विभागों में नौकरी के वक्त उचित हिस्सेदारी नहीं मिलती। इसलिए हमारी शिकायत देश के राजनीतिज्ञों से है, जिन्हें वोट बैंक की राजनीति करने से फुरसत नहीं है। क्या हम लोग किसी के वोट बैंक नहीं हैं?
5 टिप्पणियां:
हिंदी लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। बढ़िया लिखें ..हजारों शुभकामनांए
लिखते रहें। स्वागत है आपका
बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
Acchi lagi post aapki. Swagat.
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है.
खूब लिखें,अच्छा लिखें
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