गौ-रक्षा को लेकर धरणा
संजीव कुमार
कितनी बड़ी बिडंबना है कि हमारे देश में प्रजातंत्र है। और यहां जनता का शासन है लेकिन इस देश में आम जनता चाहे गाजर-मूली की तरह कट जाए उसकी परवाह करने वाला कोई नहीं है, लेकिन राजनेता की सुरक्षा हर कीमत पर होगी। जो सरकार आम जनता की रक्षा नहीं कर पा रही हो उस निकम्मी सरकार से गौ-रक्षा की गुहार करना बेमानी है। जो सरकार आम जनता की रक्षा नहीं कर पा रही हो, उस निकम्मी सरकार से गौ-रक्षा की गुहार करना बेमानी है। हाल ही मेेंं जगद्गुरु शंकराचार्य सहित अनेक धर्माचार्यों ने गौ-संरक्षण को लेकर जंतर-मंतर पर धरणा दिया। इस धरणा में कई धार्मिक संगठनों के आचार्यों ने सरकार से गौ-हत्या पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। साथ ही गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने के तर्ज पर गाय को भी 'राष्ट्रीय प्राणी' घोषित करने और गौ-रक्षा के उपाय करने का सरकार से गुजारिश किया।
ऐसा नहीं है कि गौ-वध पर प्रतिबंध की मांग पहली बार की गई। इस धरणा-प्रदर्शन के पीछे एक लंबी परंपरा है। गौ-रक्षा को लेकर सबसे पहले सात नवंबर,1966 को संसद के सामने प्रदर्शन किया गया था। इसी प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। और यह झड़प पुलिस फायरिंग में बदल गई। इस फायरिंग में अनेक प्रदर्शनकारी मारे गए। इसके बाद भी अनेक रैली और प्रदर्शन हुए। लेकिन नतीजा वही 'ढांक के तीन पात' वाली। जंतर-मंतर का हालिया रैली और प्रदर्शन नवंबर,1966 के पुलिस फायरिंग में मारे गए हिंदू प्रदर्शनकारियों के श्रध्दांजलि स्वरूप आयोजित किया गया था। गौरतलब यह है कि इस बार इस रैली और धरणा में मुसलिम समुदाय के लोगाें ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। जिस तरह से मुसलिम समुदाय के लोगाें ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया इससे आंदोलन में एक नया आयाम जुड़ गया है। इतना ही नहीं, कुरैश समुदाय के लगभग पांच लाख मुसलमानों ने भी सरकार से गौ-वध पर प्रतिबंध लगाने और उसके संरक्षण के उपय किए जाने की मांग की। इससे इस आंदोलन को बल मिलता है। इसके अलावा, इस समुदाय के लोगाें द्वारा हस्ताक्षर युक्त एक ज्ञापन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को भी दिया जाएगा। साथ ही, कुरैश समुदाय के मुसलमानों ने इस अवसर पर यह भी संकल्प लिया कि वे इस वर्ष बकरीद के त्योहार पर गायों की कुर्बानी किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
भले ही सरकार से हमें कोई उम्मीद न हो कि वह गौ-वध पर प्रतिबंध लागाएगी। लेकिन जिस तरह से कुरैश समुदाय के मुसलमानों ने गौ-वध न करने का संकल्प लिया, उससे अवश्य एक उम्मीद की किरण निकलती दिखाई देती है। अगर इसी तरह पूरा मुसलमान समुदाय गौ-वध न करने का प्रण ले ले तो निश्चय ही गौ-वध बंद हो जाएगा और हमें सरकार से इसके लिए मांग करने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस अवसर पर हिंदू और मुसलमान सहित अनेक समुदाय के लोगों ने श्रध्दांजलि सभा में भाग लिया। इस सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के.एस. सुदर्शन, विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण तोगड़िया, राष्ट्रीय मुसलिम मंच के मौलाना ओबेद इलियासी और मुहम्मद अफजाल, हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष तनवीर अहमद, जैन आचार्य विवेक मुनि, अखिल भारतीय हिंदू महासभा की अध्यक्ष हिमानी सावरकर सहित दिल्ली में भाजपा के घोषित मुख्यमंत्री विजय कुमार मल्होत्रा, पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, दिल्ली की महापौर आरती मेहरा, पूर्व सांसद बीएल शर्मा, पूर्व मंत्री सत्यनारायण जाटिया, विजय गोयल आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सभा को संबोधित किया।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने जंतर-मंतर से संसद चौक तक जाकर 1966 में गो-रक्षा आंदोलन में शहीद हुए लोगों को श्रध्दांजलि अर्पित की। इसके पहले इनके नेतृत्व में जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और तत्काल गोवध पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इस अवसर पर शंकराचार्य के साथ देनेवालों में सुमेरूपीठ के नरेंद्रानंद सरस्वती, महंत सुरेद्रनाथ अवधूत, महंत नारायण गिरि, संत हंसदास सहित अनेकों संत शामिल हुए।
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