
पिछले दिनों लगातार तीन दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन ग्राम स्वराज्य व केंद्रीय बजट की सात फीसद राशि सीधे पंचायतों को दिए जाने की मांग कर रहे थे
एक तरफ राजनीति गर्म थी। दूसरी तरफ लगातार तीन दिनों तक केएन. गोविंदाचार्य दिल्ली स्थित जंतर-मंतर से आवाज उठाते रहे। यहां वे ‘ग्राम स्वराज्य’ की बात कर रहे थे और मांग कर रहे थे कि केंद्रीय बजट की सात फीसद राशि सीधे पंचायतों को दी जाएं ताकि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज्य’ के सपने को साकार किया जा सके। राजनीतिक दलों पर पंचायतों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए चिंतक और राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संस्थापक गोविंदाचार्य ने कहा कि संघीय ढांचा तभी मजबूत होगा जब लोकतंत्र के सबसे निचले निकाय को सशक्त बनाया जाएगा।
गोविंदाचार्य ने साफ-साफ कहा कि पंचायती राज व्यवस्था पेश किए जाने के बाद से पिछले 20 सालों में सभी राजनीतिक दलों ने पंचायतों को पूर्ण अधिकार सम्पन्न बनाने की प्रतिबद्धता को नजरअंदाज किया है। वे जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के तत्वावधान में आयोजित धरने को संबोधित कर बोल रहे थे। उनके नेतृत्व में यह धरना लगातार 12, 13 और 14 मार्च को चला। गौरतलब है कि 1993 में 73वें संविधान संशोधन से पंचायती राज की हवा चली थी। वैसे गोविंदाचार्य ने यहां पंचायतों के सशक्तिकरण के साथ-साथ अविरल व निर्मल गंगा, राजनीतिक चुनाव सुधार तथा भ्रष्टाचार एवं कालाधन के विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने की भी घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट यदि 2.5 लाख करोड़ रुपए का है और देश में 2.5 लाख गांव हैं तो इस हिसाब से प्रत्येक पंचायत के खाते में 30 लाख रुपए आएंगे। गांवों से बड़े पैमाने पर पलायन के लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं। देश के पांच हजार शहर व 75 हजार गांवों में भारत की 80 करोड़ आबादी रहती है। शेष भारत के पिछड़े पांच लाख गांवों में 40 करोड़ लोग रहते हैं। सरकार पलायन रोकने की बात करती है, लेकिन भूमि अधिग्रहण के नाम पर लोगों को उजाड़ रही है। भारत के अलावा दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां गांवों में आधारभूत ढांचे का विकास नहीं हुआ है।
धरना में शामिल होने आए डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि हम सभी गोविंदाचार्यजी के साथ हैं। तीन दिनों तक चले धरने में शामिल होने देश के दूर-देहात से भी कई संगठनों के प्रतिनिधि आए थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक राकेश दुबे और कार्यकारी संयोजक सुरेंद्र बिष्ट ने निरंतर जोर देकर ग्राम स्वराज्य के हक में आवाज उठाने की बात कही।
(यह रिपोर्ट प्रथम प्रवक्ता के 1 अप्रैल के अंक में छपी हुई है।)