बुधवार, 3 जून 2009

अगर अन्याय है तब विरोध भी होगा

पिछले कुछ समय से देश में लोकसभा चुनाव का माहौल रहने के कारण जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों की खबरों को अपेक्षित महत्व भले ही नहीं मिल पाता हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विरोध का सिलसिला थम गया हो क्योंकि जबतक अन्याय है तकतक विरोध भी होता ही रहेगा

पाकिस्तान में तालिबान सिख और हिंदू परिवारों से जजिया कर वसूल रहा है। इसके विरोध में पिछले दिनों राष्ट्रीय अकाली दल ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पाकिस्तान का झंडा भी फूंका गया। प्रदर्शनके दौरान राष्ट्रीय अकाली दल के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा ''एक तरफ पाकिस्तान तालिबानियों से लड़ने के लिए अमेरिका से आर्थिक मदद प्राप्त कर रहा है। दूसरी तरफ तालिबानियों को शरण भी दे रहा है। यही कारण है कि तालिबानी सिख और हिंदू परिवारों से जजिया कर वसूल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो सिख और हिंदू परिवार जजिया कर नहीं दे पा रहे हैं वे पलायन करने को मजबूर हैं। वे अपना जान बचाने के लिए गुरुद्वारों में शरण्ा ले रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान सनातन धर्म सभा के प्रदेश अध्यक्ष मनोहर लाल कुमार ने इस मामले में केंद्र सरकार के प्रयासों को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'सरकार इसके लिए सार्थक कदम नहीं उठा रही है।' अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय अकाली दल के एक शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय में ज्ञापन दिया। इनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली पाकिस्तान में रहने वाले सिख और हिंदू परिवारों से जजिया कर लेना तुरंत बंद किया जाए। दूसरी बात इन लोगों को सताने वाले तालिबानियों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाया जाए। इन लोगों का कहना था कि अगर सरकार जल्द ही कोई सार्थक कदम नहीं उठाती है तो हमलोग पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने भी प्रदर्शन करेंगे।

कन्या भ्रूण हत्या लगातार ही सभ्य समाज के चेहरे पर कालिख पोत रही है। ऐसा नहीं है कि इसके खिलाफ कानून नहीं बना है। कानून बना है, पर उसका पालन सही तरीके से नहीं होता है। डॉक्टर आज भी चुपके से का अल्ट्रासाउंड करते हैं और गर्भ में ही नन्हीं सी जान को मार देते हैं। पिछले दिनों इसी मुद्दे को लेकर सैकड़ो महिलाओं और पुरुषों ने 'यूथ वेलफेयर फेडरेशन ऑफ इंडिया' की दिल्ली इकाई के बैनर तले जंतर-मंतर पर धरणा-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान उन लोगों का कहना था- 'सिर्फ कानून बनाने से कुछ नहीं होगा, जबतक हम अपने नजरिए में बदलाव नहीं लाएंगे। हम यह क्यों नहीं सोचते कि उस नन्हीं सी जान को भी इस दुनिया में आने का पूरा हक है। क्याेंकि, आज का बच्चा ही देश का भविष्य है। इसलिए मानव हत्या के इस जधन्य पाप से बचें और इस अभियान का हिस्सा बनें।'
बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर खुदे संविधान शब्द को हटाए जाने के विरोध में पिछले दिनों यूथ फॉर सोशल जस्टिस के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया। यूथ फॉर सोशल जस्टिस के जेनरल सेकेट्री मनमोहन सिंह के अनुसार गत 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के 118 वें जन्मदिवस पर कुछ लोग संसद भवन परिसर में लगी उनकी प्रतिमा पर श्रध्दा सुमन अर्पित करने गए थे। उन्होंने कहा, 'पहले बाबा साहेब की प्रतिमा के हाथ में एक किताब होती थी जिस पर संविधान शब्द खुदा हुआ था। इस शब्द को अब मिटा दिया गया है। इसका कारण यह है कि पिछले कुछ समय से संसदीय प्रशासन में जातीय और फासीवादी तत्वों का प्रभुत्व बढ़ गया है। ये लोग ऐसी स्थिति पैदा कर रहे हैं जिससे दलित बाबा साहेब के जन्मदिवस और पुण्यतिथि मनाने के लिए संसद के अंदर प्रवेश न कर सकें।''
अगर ऐसे लोग संसदीय प्रशासन में बने रहेंगे तो न केवल वे अपनी मनमानी करेंगे बल्कि संसद के अंदर की अमूल्य निधि को नुकसान भी पहुचाएंगे। संसद परिसर में लगी बाबा साहेब की प्रतिमा से छेड़छाड़ इसका ताजा उदाहरण्ा है। गौरतलब है कि इसको लेकर 14 अप्रैल को संसद भवन परिसर में लगभग 50 लोगों ने प्रदर्शन भी किया था। इस घटना का जिक्र करते हुए यूथ फॉर सोशल जस्टिस ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना था कि सरकार अगर जल्द ही इस मुद्दे पर कोई कदम नहीं उठाती है तो हमलोग अहिंसक आंदोलन शुरू करेंगे।